Child View
Jamiyat, Phalodi, Jodhpur, Rajasthan
पिता की प्यारी फलोदी स्थित ग्रामीण लड़कियों के "घर" के बारे 3 दिन पहले जानकारी दी थी । उसी घर में कल शाम बेटियों से मिलने उनके पिता आये । तेरह की जमियत और दो बरस बड़ी मदीना से । दोनों से पिता ने पहला सवाल किया- मन लगा हुआ है ? जमियत ने कहा- हाँ । मदीना ने भी सिर हिला के हाँ का संकेत दिया । बेटियों का जवाब सुन-देख पिता खुश दिखे । भेड़-पालक निरक्षर पिता बोले- मैं जाता हूँ , ठीक से पढना । फिर जेब से 10-10 के कुछ नोट निकाले । जमियत और मदीना के हाथ नोट की ओर बढे । मदीना का हाथ खाली लौट आया । पिता ने सारे नोट जमियत के हाथ में ही रख दिए थे । मदीना के खाली हाथ देख मुझे ठीक नहीं लगा सो केवल जमियत को रूपए देने का कारण पूछ लिया । वे बोले- मेरी वजह से इसकी एक आँख चली गयी । जमियत आठ महीने की थी । आँगन में रखी रोटियों की ओर जाती भेड़ों को रोकने लिए लकड़ी की एक छोटी सी टहनी उनकी ओर फेंकी । ये टहनी जमियत के आँख के पर जा लगी । तब से जमियत दुनिया को एक ही आँख से देख रही है । यह कहते पिता का गला भर आया । फिर संभल कर दोनों बेटियों को करीब 25-30 फुट दूर की दीवार की ओर इशारा करते हुवे कहा- अभी तुम इस दीवार तक देख पा रही हो , अगर मन लगा कर पढ़ लोगी तो दुनिया को देखने की ताकत आ जाएगी । कहाँ जाना है ? इसके लिए किसी से पूछने जरुरत नहीं होगी । क्या लिखा है ? दूसरे की आँख से पढ़ने की गरज नहीं होगी । इतना कहा और पिता शाले मोहम्मद अपने गाँव नूरे की भुर्ज की ओर लौट गए । बेटियों को सीख दे गए कि बेहतर जिंदगी के लिए तालीम बेहद जरुरी है ।
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