Ms. Manisha

फलोदी से 30 किलोमीटर दूर चारणाई गाँव है | इस गाँव में मासूम सी दिखने वाली चंचल स्वाभाव की 11 वर्षीय मनीषा कभी विद्यालय गयी ही नहीं थी | इसलिए मनीषा को ना तो हिंदी पढ़ना आता था और ना ही लिखना | वह साफ़ सफाई की बातों से भी अनभिज्ञ थी | लेकिन दूसरा दशक के इखवेलो से जुड़ने के बाद न सिर्फ पढ़ना-लिखना सीखा बल्कि अब वह कंप्यूटर भी चला लेती है | मनीषा दूसरा दशक के 4 माही आवासीय शिविर जुड़कर पढ़ाई की | शिविर में पढ़ाई करके मनीषा ने कक्षा 5 का स्तर प्राप्त किया | आज मनीषा कक्षा 6 में पढ़ रही है | आईये पढ़ते है इस चंचल किशोरी की कहानी |

मनीषा बचपन से ही चंचल स्वाभाव की है, इसी स्वाभाव के कारण मनीषा किसी से भी आसानी से घुल-मिल जाती है | इखवेलो पर आने से पूर्व मनीषा का दिन अपने आस-पास के घरों में घूमना, खेलना, लड़ाई-झगड़े, मस्ती करने में ही निकल जाता था |

मनीषा सन 2015 में चारनाई गाँव में इखवेलो से जुडी | जहाँ पर ज्ञान-विज्ञान, खेलकूद, कंप्यूटर आदि गतिविधियाँ होती है | इखवेलो से जुड़ना मनीषा के लिए एक अनूठा अनुभव रहा | इखवेलो ने मनीषा की दिनचर्या ही बदल दी | मनीषा ने पहले कभी ना तो कंप्यूटर देखा था और ना ही छुआ था | प्रारंभ में वह झिझकती थी, लोगो से कम बात किया करती थी | लेकिन समय के साथ-साथ उसकी झिझक दूर हुयी और वह अब रोज इखवेलो आती है और जो उसे पसंद आता वह गतिविधी करती | जैसे :- कंप्यूटर चलाना, कहानियाँ पढना आदि |

इखवेलो पर लगातार आने से मनीषा में कई बदलाव हुए | अब वह स्वयं भी साफ-सफाई से रहती है, और अपने परिवार एवं इखवेलो पर आने वाले बच्चों को भी साफ़-सफाई से रहने के बारे में बताती है | मनीषा ने कभी सोचा नहीं था की वह कभी हिंदी लिख व पढ़ पायेगी लेकिन अब मनीषा ने हिंदी के साथ-साथ गणित भी सीख रही है | इतना ही नहीं सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है की अब मनीषा कंप्यूटर भी चला लेती है | जैसे : यूट्यूब पर विडियो सर्च करना, गूगल पर सर्च करना, टाइपिंग, पेंटिंग, एक्सेल आदि | मनीषा अपने साथियों को भी कंप्यूटर सिखाने लगी है | मनीषा ने इखवेलो पर सबसे अधिक किताबें पढ़ी है | मनीषा में अब पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ गतिविधियों में भाग लेती है |

मनीषा मदरसा भी जाती है एवं इखवेलो संचालन में मदद भी करती है | इसके साथ वह किशोर-किशोरियों को भी इखवेलो से जोड़ने का प्रायस कर रही है |

Ms. Manisha