Ms. Lalita Prajapat

धणी गाँव की रहने वाली 22 वर्षीय ललिता प्रजापत एक गरीब परिवार से है | वह अपनी उदासी भरी दुनिया में खोयी रहती थी | वह ना किसी से अपने मन की बात कहती और ना ही कोई उससे उसकी मन बात पूछता | ललिता पढाई में बहुत होशियार है, और वह डॉक्टर बनना चाहती थी | इसलिए वह घर के काम से साथ-साथ पढाई भी किया करती थी |

ललिता की माता की तबियत अक्सर ख़राब ही रहती थी, और पिताजी के हाथ-पैर लकवा से ग्रसित हो गए | माता-पिता दोनों की तबियत ख़राब होने से सभी परेशान हो गए | क्योकिं आर्थिक रूप के सभी पिताजी पर ही निर्भर थे | मज़बूरी में ललिता को कक्षा 6 के मध्य में ही पढाई छोड़नी पड़ी | ललिता के भाई ने भी अपनी एक दुकान खोल ली लेकिन फिर भी परिवार का खर्चा नहीं चल पा रहा था | इस स्थिति में ललिता ने भी परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग करने का निर्णय लिया और गाँव की अन्य किशोरियों के साथ छाता फैक्ट्री में कार्य करने लगी, लेकिन वह वहा भी गुमसुम रहती थी |

दूसरा दशक द्वारा किये जा रहे सर्वे के दौरान धणी इखवेलो प्रभारी (लक्ष्मण प्रजापत) का सम्पर्क ललिता से हुआ | बातचीत के दौरान ललिता ने अपने बारे में बताया | इखवेलो प्रभारी ने ललिता को इखवेलो के बारे में बताया और कहा की जब भी समय मिले केंद्र पर आया करो |

कुछ दिन पश्चात् ही ललिता इखवेलो पर आई | इखवेलो पर स्वतंत्र रूप से सीखने के माहोल को देखकर वह बहुत खुश हुई | अब वह फैक्ट्री से आने के बाद कुछ समय इखवेलो पर बिताने लगी, इखवेलो की अन्य गतिविधियों के साथ-साथ कंप्यूटर भी सीखने लगी | इसी दौरान ललिता ने इखवेलो प्रभारी से अपने मन की बात बताई की वह आगे पढना चाहती है, लेकिन वह क्या करें, कैसे करे की वह अपनी पढाई को जारी रख सके | इखवेलो प्रभारी ने RSOS प्रक्रिया के बारे में बताया और यह भी विश्वास दिलाया की पढाई करने में उसका पूरा सहयोग किया जायेगा | ललिता बहुत खुश हुयी, जैसे उसकी मन की मुराद पूरी हो गयी हो | ललिता ने अपनी कमाई से कुछ पैसे बचाकर RSOS का फॉर्म भरा और इखवेलो के सहयोग से पढ़ाई करने लगी | ऐसे ललिता ने दसवीं पास की एवं उसके पश्चात् बारहवी का भी फॉर्म भरा | इस प्रकार वह अपनी पढ़ाई जारी रख रही है |

वर्तमान में ललिता को अपनी इच्छा अनुसार कार्य मिला | वह सभी को उत्साहित होकर बताती है की वह जैन हॉस्पिटल फलना में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्य कर है | इसके साथ-साथ नर्सिंग का भी कार्य करती है | कार्य के दौरान उसे कई चिकित्सकीय उपकरणों की जानकारी हुयी है | वह कहती है की “मैं डॉक्टर नहीं बन पायी तो क्या हुआ, मैं एक अच्छी नर्स बनकर लोगो की सेवा करूँगीं |”

ललिता कहती है की दूसरा दशक के इखवेलो से जुड़ने के कारण ही वह अपनी आगे की पढाई जारी रख सकी और कंप्यूटर की बेसिक जानकारी भी प्राप्त की | यदि ऐसा नहीं होता तो वह आज भी छाता फैक्ट्री में ही कार्य कर रही होती और उसके जीवन में उदासीनता ही रहती |

Ms. Lalita Prajapat