Ms. Shobha Kumari

पाली जिले के एक छोटे से गाँव कोट सोलंकियान की रहने वाली है शोभा कुमारी का घर अरावली की तलहटी के करीब है | शोभा का प्रतिदिन बकरी चराने एवं खेत पर काम करने में बीता करता था | पढाई की इच्छा रखने वाली यह किशोरी कई वर्षो तक शिक्षा से वंचित रही, जबकि घर में इसका बड़ा भाई स्कूल जाता था | बकरिया चराने के दौरान शोभा की मुलाकात रजनी दीदी (परियोजना निदेशक, देसुरी ब्लॉक) से हुयी तब शोभा लगभग 12 वर्ष की थी| रजनी दीदी को देखकर यह किशोरी पेड़ पर चढ़ गयी क्योंकि उसे लगा की कहीं ये इसे अपने साथ ले जाकर बेच ना दे | रजनी दीदी के कई बार कहने पर यह किशोरी काफी सहमी हुयी उनके पास पहुची, और डर-डर कर अपने व अपने परिवार का परिचय दिया | रजनी दीदी द्वारा जब इस किशोरी से पढने की इच्छा के बारे में पूछा गया तो उस किशोरी का एक ही जवाब था की “म्हारी बकरिया कुण चराई (मेरी बकरी कौन चरायेगा)” | काफी समझाने के बाद उसने पढ़ने की इच्छा जाहिर की लेकिन उसके चेहरे पर मायूसी थी, रजनी दीदी के पूछने पर उसने बताया की उसकी मम्मी उसे पढ़ने नहीं भेजेगी |

अब शाम होते ही रजनी दीदी व उनके साथी शोभा के घर पहुचे एवं उसकी माता से बातचीत की, लेकिन परिवार से सभी सदस्य ने यही जवाब दिया की “लड़की अगर घर का काम करेगी तो सही रहेगा इसके भविष्य के लिए, पढ़ के कोई नौकरी तो लगेगी नहीं” | लेकिन शोभा व रजनी दीदी ने हार नहीं मानी | शोभा की पढ़ने की जिद और रजनी दीदी के प्रयासों से सन् 2008 में शोभा ने चार माही आवासीय शिविर में प्रवेश लिया | अपनी शिक्षा को लेकर शोभा की यह जंग यहीं समाप्त नहीं हुयी | एक महीने तक शिविर में शोभा का मन नहीं लगा, रोज रोना, जाति का भेदभाव करना एवं घर जाने के लिए बीमारी का झूठा बहाना बनाना आदि | इन सबके बावजूद भी रजनी दीदी ने अपने प्रयास जारी रखे, एवं उसके साथ व्यक्तिगत समर्थन जारी रखा जैसे- उसके साथ भोजन करना आदि | इसके बाद शोभा ने भेदभाव करना छोड़ दिया एवं शिविर में मन लगाकर पढाई करते हुए शिविर से पांचवी कक्षा तक का स्तर प्राप्त किया |

शिविर से समाप्त होने के पश्चात शोभा आगे भी पढ़ना चाहती थी लेकिन अब फिर उसके परिवार के सदस्यों ने यह कहकर मना कर दिया की “पांचवी तक पढ़ाई कर ली अब क्या करेगी आगे पढ़ के” | लेकिन शोभा नहीं मानी और किसी भी तरह अपने बड़े भाई को मनाकर “कस्तूरबा गाँधी विद्यालय, नाडोल” में प्रवेश लिया, जहाँ से आठवी कक्षा उतीर्ण की | आगे पढने जिद के कारण शोभा के पिताजी ने उसे गाँव के विद्यालय में उसका प्रवेश करवा दिया | जब शोभा ने 10वीं कक्षा में प्रवेश किया तो उसकी माता की तबीयत बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी थी | माँ का दुःख शोभा से देखा नहीं जाता था इसी चिंता के कारण शोभा की तबीयत भी ख़राब हो गयी और वह 10 वीं कक्षा की परीक्षा नहीं दे सकी | 10 वीं कक्षा पास ना होने से शोभा बहुत दुःखी थी और वह बहुत रोई | शोभा ने दुबारा 10 वीं कक्षा की पढाई कर उतीर्ण की | माता-पिता दोनों शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं थे इसलिए आर्थिक रूप से केवल बड़े भाई पर ही निर्भर थे | इसलिए 12 वीं कक्षा की पढाई के दौरान उसने एकल विद्यालय केंद्र में शिक्षिका रूप में कार्य करना प्रारंभ किया जहा उसे प्रति माह 1000/- रुपये मानदेय प्राप्त होता था | लेकिन 12 वीं परीक्षा नजदीक होने के कारण 5 महीने बाद उसे यह कार्य छोड़ना पड़ा, एवं उसने 12 वीं कक्षा भी उतीर्ण कर ली | शोभा अब बी.ए. भी करना चाहती थी लेकिन परिवार आर्थिक रूप से पहले से ही कमजोर था | पढाई के लिए अपनी माँ से कई बार जिद करने पर शोभा की माता ने उसे अपने पास छुपा के रखे हुए 2000/- रूपए दिए और कहा की “अभी इन रुपयों से कॉलेज की प्रवेश फीस दे दे, बाकि बाद में देखते है” | शोभा ने कॉलेज में प्रवेश लिया, जो गाँव से 12 किलोमीटर दूर है | आज शोभा में इतना आत्मविश्वास है की वह किसी से भी निडर होकर बात कर सकती है चाहे वो जिले का कलेक्टर ही क्यों ना हो | आज शोभा दूसरा दशक के माध्यम से Y.P. Foundation से जुड़कर SRHR (Sexual and reproductive health and rights) के मुद्दे पर खुल कर बात कर लेती है | शोभा कैंप में रूक कर वहां पढ़ रही किशोरियों की पढ़ने में सहायता भी करती है | दूसरा दशक के जुड़ने के बाद शोभा के सोच में भी काफी बदलाव हुआ | शोभा कहती है की हमारा समाज है डिब्बे की तरह है जो लड़की इस डिब्बे में बंद रहेगी उसे अच्छा माना जायेगा और जो इस डिब्बे को तोड़कर बहार निकल जाएगी उसे बुरा माना जायेगा | शोभा इस सामाजिक डिब्बे को तोड़कर अपनी जिंदगी को बेहतर बना रही है | आज शोभा के परिवार के सभी सदस्य दूसरा दशक से जुड़े है | शोभा अपने गाँव में सभी को जागरूक करती है की लड़के-लडकियों में कोई फर्क नहीं है एवं जिस प्रकार लडको को अपने जिंदगी में आगे बढ़ने का हक़ है उसी प्रकार लडकियों को भी हक़ है | अब शोभा की माँ शोभा को अपने बेटे की तरह ही देखती है | अब पूरा गाँव शोभा को समर्थन करता है | अभी शोभा ने पुलिस कांस्टेबल का फॉर्म भरा है एवं उसकी तैयारी कर रही है |

Ms. Shobha Kumari